पीलिया (कावीळ) का आयुर्वेदिक इलाज पीलिया की दवा

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पीलिया का आयुर्वेदिक इलाज
पीलिया का आयुर्वेदिक इलाज

पीलिया

पीलिया का आयुर्वेदिक इलाज
पीलिया का आयुर्वेदिक इलाज

दोस्तों  पीलिया (कावीळ) एक ऐसा रोग है | piliya ka gharelu upay ilaj in hindi जिसमे रोगी के त्वचा ,पेशाब ,पसीना ,आंखे और कपडे सभी पीले हो जाते है |

रोगी को बुखार भी रहता है |
यह यकृत (लीवर )की बिमारी है | लीवर शरीर की सबसे  बडे ग्रंथी तथा महत्वपूर्ण अंग है |
इसमे से एक रस निकलता है ,जिसे पित्त कहते है | यही रस भोजन को पचाने का काम करता है |

 लीवर व्दारा पित्त की नली से जो पित्त पक्वाशय में भोजन को पचाने के लिए आता है ,वह असलीयत में बहुत विषैला होता है |

अगर किसी वजह से नली बंद हो जाती है और पित्त छोटी आत में न जाकर खून में मिल जाता है तो सारे शरीर का खून विषैला हो जाता है |

तभी यह रोग होता है | शरीर के अन्य सभी यंत्रो में जो जहर समान पदार्थ निकला करत है ,वे पित्त का बराबर विषैला नहीं होते है |

पित्त का जहर खून में मिलकर शरीर के सभी यंत्रो को विषैला बना देती है ,
इसी वजह से इस रोग में रोगी के शरीर में कमजोरी और धाकवट आती है |

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पीलिया के लक्षण :

रोगी को भूक में कमी ,सिरदर्द ,आलस ,नींद की कमी ,मुह का स्वाद खराब होना,बदन टूटना आदि लक्षण सामने आते है |

यही नही रोगी का पेट भी खराब हो जाता है |
उसे हरे या सफेत रंग का बदबुदार शौच होती है |

पीलिया का इलाज :

 इसके इलाज के लिए एक लीटर हलके गरम पानी में एक नीबू का रस  डालकर एनिमा ले|
एक हफ्ते तक रोजाना ऐसा करने पश्चात हफ्ते में दो बार एनिमा ले |

एक हफ्ते तक रोज हलके गरम (बिना नमक के )पानी का कुंजल करे |
बाद में इसे भी हफ्ते में दो बार ही  करे |

  • एक हफ्ते छेने के पानी में शहद मिलाकर या बिना क्रीम के दूध में शहद मिलाकर ,सब्जी का सूप ,रसदार मीठे फल पपीता ,खरबूज ,तरबूज आदि ले |
  • एक बार में एक ही चीज लेनी चाहिए | दूसरी चीज , जो मौसम के अनुसार आसनी से उपलब्ध हो सके , डेढ -दो घंटे बाद ले |
  • अच्छे वैद या डॉक्टर से चिकित्सा के साथ-साथ शुरू में निम्बू के रस के साथ ज्यादा पानी का प्रयोग करे , जिससे कि खुलकर पेशाब आए |
    अगले तीन दिन गन्ने का रस और नीबू पानी , बाद में एक हफ्ते तक संतरा ,मौसमी ,तरबूज ,पेठा ,गाजर ,खीरे ,आदि जूस शहद में मिलाकर ले |
  • इस रोग में रोगी को अधिक परिश्रम से बचना चहिए |
    जब तक रोगी रसाहार पर रहे ,उसे पूरा आराम करना चहिए |जब शरीर में शक्ती आए तो वह थोडा बहुत काम कर सकता है |
    इससे समय बरतना चहिए ,क्योकी यह रोग  एकदम से नही धीरे-धीरे ही ठीक होता है |
    इसमें पर्याप्त आराम की जरुरत होती है तथा खान-पान को स्वच्छ और शुध्द रखना पडता है |
  • जब शरीर का पिलापन कुछ ठीक हो और कुछ राहत मिले , तो सुबह नाश्ते के साथ दलिया या सुजी की खीर ले |
    दोपहर में एक या दो चपाती ,सलाद केवल उबली हुई बिना घी की सब्जी ,दही का रायता ले |
    बाकी समय सब्जी के रस ,सब्जी के सूप व फल ही  सेवन करे.

पीलिया का मंत्र

पीलिया का मंत्र

“ओम नमो बैताल। पीलिया को मिटावे, काटे झारे। रहै न नेंक। रहै कहूं तो डारुं छेद-छेद काटे। आन गुरु गोरख-नाथ। हन हन, हन हन, पच पच, फट् स्वाहा।”

इस मंत्र का जप करने का विधी – मन्त्र को ‘सूर्य-ग्रहण’ के समय १०८ बार जप कर के सिद्ध करें.

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