मानसिक रोग की पहचान कैसे करे?

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नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? दोस्तों, आजकल की मॉडर्न और गतिशील दुनिया में हम लोग एक दूसरे को वक्त नहीं दे पाते हैं। आज की २१वीं सदी में स्ट्रेस काफी आम बात हो गई है। लेकिन, इसी स्ट्रेस की वजह से हम लोगों से दूर होते जाते हैं और काफी अकेले हो जाते हैं। हमें अकेलापन महसूस होने लगता है और इसी अकेलेपन में हम मानसिक रोग का शिकार हो जाते हैं। उसमें काम का स्ट्रेस, रिलेशनशिप मेंटेन रखने का स्ट्रेस, सोसायटी में स्टेटस मेंटेन करने के लिए जीतोड़ मेहनत; ऐसे अलग-अलग चीजों का हम स्ट्रेस लेते हैं। लेकिन, यह सब करते करते हम कई बड़ी बीमारियों का शिकार हो जाते हैं और हमें पता भी नहीं चलता! मानसिक रोग एक ऐसी ही धीरे-धीरे होनेवाली बीमारी है। यह ज्यादातर स्ट्रेस की वजह से होती हैं।

मानसिक रोगी अपनी भावनाओं, अपने विचारों पर काबू नहीं रख पाता है। इसीलिए, उसकी क्रियाएं और प्रतिक्रियाएं थी काबू में नहीं रहती हैं। हमारे में हुए इन अनचाहे बदलाव का हमारा परिवार भी समर्थन नहीं करता है और हम ज्यादा स्ट्रेस में डूबते जाते हैं। मनोविज्ञान में इसे “मनोविकार” कहते हैं। स्ट्रेस के साथ ही मानसिक रोग के कई कारण हो सकते हैं। जैसे; अनुवांशिकता, कमजोर व्यक्तिमत्व, बाल्यावस्था में आए कुछ अनुभव और कठिन परिस्थितियों का सामना करने में असमर्थता ऐसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। तो दोस्तों, आज हम जानेंगे मानसिक रोग के बारे में।

मानसिक रोग की पहचान

जब कोई इंसान अपने रोजमर्रा के कामों में पूरी तरह से ध्यान नहीं लगा पाता है और उनमें हमेशा ही गलती कर बैठता है, वह अपनी बातें किसी को समझा भी नहीं पाता है और ना ही दूसरों की बातें समझ पाता है, उसे अपने व्यवहार, विचारों, अपनी गतिविधियों तथा अपनी भावनाओं पर कोई काबू नहीं रहता है; तो ऐसे में वह मानसिक रोगी कहलाता है।

मानसिक रोग किसी भी इंसान को किसी भी आयु में हो सकता है। मानसिक  रोग के लक्षण उनके प्रकार के ऊपर निर्भर होते हैं। आजकल के पढ़े लिखे लोग भी मनोचिकित्सक के पास जाने से डरते हैं। क्योंकि, उन्हें लगता है कि लोग उनको पागल कहेंगे। लेकिन, मानसिक रोग होना मतलब आप पागल है; यह बात सही नहीं है। मानसिक रोग कई प्रकार के होते हैं और उनके अनुसार उनकी ट्रीटमेंट होती हैं। अगर, आप वक्त रहते डॉक्टर की सलाह लें, तो आप भी एक खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

मानसिक रोग के प्रकार

मानसिक रोग के कई प्रकार होते हैं।

  1. डर (फोबिया)
  2. भ्रम
  3. पोस्ट ट्रौमाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर
  4. लत संबंधी विकार
  5. ओसीडी
  6. डिमेंशिया
  7. अल्जाइमर
  8. बायपोलर डिसऑर्डर
  9. ऑटिज्म
  10. डिप्रेशन

मानसिक रोग के कारण

मानसिक रोग के कई कारण हो सकते हैं।

१) अनुवांशिकता- कई बार मानसिक रोग उन लोगों में ज्यादा पाया गया है, जिनके रिश्तेदारों तथा परिवार वालों को भी मानसिक रोग की समस्या हुई हो। ऐसे कई अनुवांशिक कारक होते हैं, जो आपमें मानसिक रोग को बढ़ावा देते हैं।

२) स्ट्रेस- हमारी जिंदगी में हम कई बार ज्यादा तनाव का अनुभव करते हैं। हमारी जिंदगी में कई घटनाएं घटती है; जैसे किसी अपने की मृत्यु, तलाक होना, वित्तीय समस्याएं या नौकरी का जाना। ऐसी कई समस्याओं का हम सामना करते हैं और इन वजह से भी हमें ट्रस्ट होता है। ज्यादा स्ट्रेस होने की वजह से हमें मानसिक रोग हो सकता है।

३) डिप्रेशन- हमारे ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर ब्रेन के रसायनों को मस्तिष्क और शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने का काम करते हैं। इस काम से जुडी किसी तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी हो जाए और वह ठीक से काम ना करें, तो तंत्रिका रिसेप्टर्स और तंत्रिका तंत्र में बिगाड़ होकर परिवर्तन होता है। इसे डिप्रेशन कहते है। इससे भी हम मानसिक रोग का शिकार हो जाते हैं।

४) बचपन के अनुभव- जब हम बच्चे होते हैं, तब हमारा मन बहुत ही कोमल होता है। कभी-कभी बचपन में हमारे साथ कोई दुर्व्यवहार हो जाए, तो हम उसे भूलते नहीं हैं। बचपन में आए ये कुछ कटु अनुभव हम जिंदगीभर नहीं भूलते हैं। यह दर्दनाक अनुभव हम किसी के साथ शेयर करने से डरते है। ऐसे में हम डिप्रेशन में चले जाते हैं। इसी के चलते, हम मानसिक रोग का शिकार हो जाते हैं।

५) शराब या ड्रग्स का सेवन- कभी कभी जिंदगी में हम बुरी लतों का शिकार हो जाते हैं। शराब का सेवन या ज्यादा मात्रा में ड्रग्स का सेवन हमें निराशा की ओर ले जाता है। हम निराशावादी सोचने लगते हैं। ऐसे में हमें मानसिक रोग कब हो जाता है, हमें पता भी नहीं चलता।

मानसिक रोग के लक्षण

मानसिक रोग के लक्षण उनके प्रकारों पर निर्भर होते हैं। अलग-अलग प्रकार के मानसिक रोगों के अलग-अलग लक्षण होते हैं।

  1. मनोदशा में अधिक परिवर्तन होने से उदास महसूस होना। अपनी क्रियाओं और भावनाओं पर काबू ना होना।
  2. अत्याधिक डर, भय, चिंता और अपराधिक भावनाओ का अनुभव करना। उस वजह से रोजमर्रा की जिंदगी में लक्ष्य केंद्रित करने में दिक्कत महसूस करना।
  3. अपने दोस्तों से, अच्छी गतिविधियों से दूर होना और शराब, ड्रग्स जैसी नशीली चीजों का अधिक मात्रा में सेवन करना।
  4. वास्तविकता से अलग अनुभव करना और मतिभ्रम, भ्रम और पागलपन महसूस होना।
  5. अपने दैनिक जीवन में आनेवाली समस्याओं से निपटने में परेशानी होना तथा अपने लोगों की भावनाएं, बाते समझने में परेशानी हो ना।
  6. खानपान की आदतों में बड़ा बदलाव आना तथा अधिक हिंसक और क्रोधित बर्ताव करना।
  7. कामेच्छा संबंधी बड़ा बदलाव आना। आत्मघात जैसे विचार मन में आना।

मानसिक रोग के उपचार

मानसिक रोग पर अनेक प्रकार की उपचार पद्धति उपलब्ध है। आपके डॉक्टर आपकी मानसिक रोगों की तीव्रता देखकर आपके ऊपर उपचार पद्धति अपनाएंगे।

१) मेडिसिन- मानसिक रोग के लिए यह सबसे आम उपचार पद्धति हैं। आपके मानसिक रोगों के लक्षणों को देखकर डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां लिख कर देते हैं। जैसे; एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां, मूडस्टेबिलाइजर दवाइयां, मनोविकार नाशक दवा आदि।

२) मनोचिकित्सा- मनोचिकित्सा के कई अलग-अलग प्रकार होते हैं। जैसे; ग्रुप थेरेपी में कई लोग शामिल होते हैं और एक चिकित्सक सबका नेतृत्व करता है। पारिवारिक चिकित्सा में परिवार के सदस्य समस्या से निपटने के लिए चिकित्सक से मिलते हैं। व्यक्तिगत चिकित्सा में मरीज़ अपने चिकित्सक के साथ मिलकर कई प्रकार के तरीकों से मानसिक स्वास्थ्य, भावनाओ का इलाज कराते हैं। इन चिकित्साओं के प्रकार में मरीज को ठीक होने में काफी मदद मिलती है।

३) वैकल्पिक उपचार- इस उपचार पद्धति में अलग-अलग तरह के उपचार अपनाते हैं। आपके चिकित्सक आपको पौष्टिक आहार लेने की सलाह देते हैं। पौष्टिक और सात्विक आहार लेने से हमारे शरीर की कार्यप्रणाली ठीक से काम करती हैं और इससे हमारा ब्रेन भी संतुलित रहता है। योग, मेडिटेशन, व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। योग तथा प्राणायाम करने से हमें मन को शांति मिलती हैं और नकारात्मक विचार हमसे दूर रहते हैं।

मानसिक रोग की पहचान कैसे करे
मानसिक रोग की पहचान कैसे करे

अन्य उपाय

इसी के साथ, कुछ अन्य उपाय है जो आप घर के घर अपना सकते हैं। जैसे; आपकी कुछ हॉबीज होती हैं और उससे आपको बहुत आनंद मिलता हो, आपके दिल को सुकून मिलता हो। ऐसी हॉबीज को रोजाना अपने जीवन में शामिल करें। जैसे; गाने गाना, अपने पेट्स के साथ टहलने जाना, फ्रेंड्स के साथ टाइम स्पेंड करना, पेंटिंग करना आदि हॉबीज की वजह से आपको समाधान मिलता है और नकारात्मक विचार आपसे दूर रहते हैं। अपनी मनपसंद चीजें करने से हमारा टाइम अच्छे से स्पेंड होता है और ऐसे एक्टिविटी से हमें तरोताजा भी महसूस होता है।

इन सभी उपचारों का तभी असर होगा, जब मानसिक रोगी के परिवार के सारे सदस्य उसके साथ सपोर्ट में खड़े होंगे। आप मानसिक रोगी को अकेला ना महसूस होने दे, उससे अच्छी अच्छी बातें करें जिससे कि उसे मोटिवेशन मिले और कुछ दिनों के अंतराल के बाद आप कहीं घूमने जाने का भी प्लान कर सकते हैं। क्योंकि, डॉक्टर के पास ट्रीटमेंट करवाने से मानसिक रोगी ऊब जाते हैं। अध्ययन के अनुसार यह देखा गया है, कि परिवारवालों का सपोर्ट मानसिक रोगियों को जल्दी ठीक कर देता है और वह आगे नॉर्मल जिंदगी जीते हैं।

दोस्तों, सबसे पहले तो मानसिक रोगी मतलब आप पागल है; ऐसा नहीं होता है। मानसिक रोगियों को इस चीज को समझना होगा और जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। इसी के साथ, हमेशा ही सकारात्मक विचार करें। क्योंकि, कोई भी थेरेपी तभी काम करती है; जब आप उसके लिए सकारात्मक होते हैं। दोस्तों, उम्मीद है आपको आज का यह ब्लॉग काफ़ी इंफॉर्मेशन दे गया हो और आपको अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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