मल त्याग में दर्द कैसे ठीक करें

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज के लोगो की जीवनशैली बहुत ही एडवांस हो चुकी हैं। उनको सब कुछ इंस्टेंट पसंद होता है। जैसे; जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स। यह पदार्थ आसानी से बाहर मिल जाते हैं और इनको पकाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता। लेकिन, इस जंक फूड को खाने से और कोल्ड ड्रिंक के पीने से हमारे शरीर को बहुत नुकसान पहुंचता है। ऐसे में, हमें पेट की समस्याएं उत्पन्न होती है और हमारा बाउल मूवमेंट ठीक से नहीं होता है। बाउल मूवमेंट ठीक से ना होने की वजह से हमें मल त्याग करने के दौरान काफी दर्द महसूस होता है।

मल त्याग में दर्द होने के बारे में हम बात करने से हिचकिचाते हैं और बहुत असहज हो जाते हैं । कभी-कभी ऐसे हो सकता है, कि हमें मल त्याग करने के दौरान दर्द हो। लेकिन, ऐसा अगर रोज होने लगे तो यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। अगर इस पर आपने तुरंत ध्यान नहीं दिया और इलाज नहीं किया; तो आगे जाकर यह बहुत बड़ी परेशानी साबित होती है। मल त्याग की समस्याएं आमतौर पर कब्ज, बवासीर के मरीजों को होती है। तो दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं मल त्याग में दर्द होने के कारण और उन पर घरेलू इलाज।

मल त्याग से होने वाले दर्द होने के कारण

मल त्याग के समय दर्द होने के कई कारण होते हैं। कभी-कभी सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज की वजह से भी मल त्याग करने में दर्द होता है। ऐसे कई अन्य कारण होते हैं।

  1. बवासीर- बवासीर की समस्या आजकल बहुत आम बात हो गई है। कई सारे लोगों को टॉयलेट में ज्यादा देर तक बैठने से और मल त्याग करते समय ज्यादा जोर लगाने से इसकी समस्या उभर कर आती हैं। बवासीर की वजह से आपको मल त्याग करने में कठिनाई होती हैं और दर्द महसूस होता है। बवासीर में मलद्वार के आसपास की नसों में सूजन आ जाती हैं और कभी-कभी मल त्याग करते समय खून भी आता है।
  2. इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज- इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज के कई प्रकार होते हैं। इनमें से, अल्सरेटिव कोलाइटिस इस प्रकार में कोलन और मलाशय में सूजन और अल्सर हो जाता है। अल्सरेटिव कोलाइटिस की वजह से मल त्याग में दर्द होता है और खून भी आता है। इसी के साथ, आईबीडी का दूसरा प्रकार है क्रोहन डिजीज। इसके लक्षण भी अल्सरेटिव कोलाइटिस के जैसे ही होते हैं। मल त्याग करने के दौरान दर्द होता है और मवाद वाले दस्त होते हैं। इन दोनों डिजीज में आपकी बाउल मूवमेंट पर असर होता है और पेट में ऐठन महसूस होती है। जिस वजह से मल त्याग करने में काफी परेशानी होती है।
  3. एंडोमैट्रियोसिस- महिला के गर्भाशय के अंदर बढ़ने वाले टिशूज, युटेरस की आउटर लाइन पर बढ़ने लगते हैं और इस परिस्थिति में खून बहने लगता है। इसी को एंडोमेट्रियोसिस कहते हैं। एंडोमेट्रियोसिस में भी मल त्याग करते समय दर्द होता है।
  4. स्किन की समस्याएं- सोराइसिस, एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधित समस्याएं आपके एनल एरिया को भी प्रभावित कर सकती हैं। इस दौरान मल त्याग करने से पहले, मल त्याग करते समय और मल त्याग करने के बाद में भी दर्द होता है। इसी के साथ, एनल एरिया में खुजली तथा जलन भी हो सकती हैं।
  5. एनल कैंसर- एनल कैंसर के दौरान मल त्याग में काफी परेशानी होती है और वह ज्यादा दर्दनाक होता है। मल त्याग के दौरान दर्द और दबाव महसूस होने के अलावा रक्तस्त्राव भी होता है। यह एनल कैंसर का शुरुआती लक्षण होता है। इसी के साथ, एनल कैंसर में खुजली और डिस्चार्ज भी हो सकता है।
  6. सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज- सिफीलिस और क्लैमीडिया यह सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिसीस होते हैं। यह रोग बैक्टेरियल संक्रमण से होते हैं। यह रोग किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से होते हैं। इनके रोगियों को मल त्याग करने में दर्द होता है, मलाशय में सूजन आ जाती है, पेशाब करते समय जलन महसूस होती है और शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द होता है।

मल त्याग से होने वाले दर्द के लिए घरेलू इलाज

मल त्याग के इस दर्द को ठीक करने के लिए आप कुछ घरेलू नुस्खे आजमा सकते हैं। मल त्याग के दर्द को ठीक करने के लिए सबसे पहले तो आपको अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाने होंगे, जिससे कि यह प्रॉब्लम आपको होगी ही नहीं।

  1. फाइबर युक्त आहार- फाइबर युक्त आहार लेने से हमारी बाउल मूवमेंट अच्छे से होती है और हमें मल त्याग में परेशानी नहीं होती। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, ओट्स, साबुत अनाज जैसे पदार्थ फाइबर से भरपूर होते हैं। इन पदार्थों का अपने आहार में समावेश करें और अपने पाचन तंत्र को मजबूत बनाएं। इससे आपको मल त्याग करने में भी परेशानी नहीं होती है।
  2. पानी- मल त्याग के दर्द को ठीक करने के लिए और मल त्याग को आसान करने के लिए आप ज्यादा मात्रा में पानी ए।पि कब्ज, बवासीर के मरीजों को पानी पीना बहुत आवश्यक होता है। पानी आपको हाइड्रेटेड रखता है। इसी के साथ, आप कार्बोनेटेड पानी भी पी सकते हैं। इस पानी से अपचन और पेट की समस्याओं से राहत मिल सकती हैं। लेकिन, ज्यादा मात्रा में कार्बोनेटेड पानी का सेवन ना करें। इससे समस्या और बढ़ सकती है।
  3. प्रोबायोटिक्स का सेवन- दही, छाछ जैसे प्रोबायोटिक्स आसानी से उपलब्ध होते हैं और आप इंह रोजाना खा सकते हैं। आजकल मार्केट में प्रोबायोटिक से भरपूर कई प्रोडक्ट उपलब्ध होते हैं। इन प्रोबायोटिक्स के सेवन से पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या ठीक हो सकती हैं। प्रोबायोटिक्स में लैक्टोबैसिलस जैसे गुड बैक्टीरिया होते हैं, जो आपके आंत को मजबूती प्रदान करते हैं। इसी के साथ, प्रोबायोटिक्स के सेवन से कब्ज और बवासीर की बीमारी का इलाज भी होता है। इसीलिए, मल त्याग में हो रहे दर्द को मिटाने के लिए आप प्रोबायोटिक्स का सेवन अवश्य करें।
  4. एलोवेरा- एलोवेरा एक ऐसी औषधि है, जो हमारी त्वचा के संबंधित सभी समस्याओं के ऊपर कारगर साबित होती हैं। मलद्वार में हो रही सूजन, जलन तथा खुजली को मिटाने के लिए आप एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें। एलोवेरा जेल को आप सीधा मलद्वार के आसपास लगा सकते हैं। एलोवेरा में एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जो गुदा में हो रही जलन तथा सूजन को कम करते हैं। इसी के साथ, कोई अन्य संक्रमण होने से बचाते हैं।
  5. नारियल तेल- नारियल तेल नेचुरल मॉइश्चराइजर होता है। नारियल तेल को आप गुदा के अंदर और बाहर दोनों जगह लगा सकते हैं। नारियल तेल लगाने से आपके गुदा पर जलन तथा लालिमा में राहत मिलेगी और मल त्याग करते समय आपको दर्द नहीं होगा।
  6. आइस पैक- मल त्याग में हो रही समस्या के लिए आप आइस पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइस पैक को एक टॉवल में अच्छे से लपेट लें और उसको मलद्वार के आसपास लगाएं और लगभग १५ मिनट तक सिकाई करें। इसकी सिकाई से जलन, सूजन और दर्द से राहत मिलती है। सिर्फ इस बात का ध्यान रखें, कि आइस पैक को सीधा प्रभावित हिस्से पर ना लगाएं; उससे टिशु डैमेज होने का डर रहता है।
  7. एक्सरसाइज- अध्ययन के अनुसार, रोजाना एक्सरसाइज करने से मल त्यागने में हो रहे दर्द को ठीक किया जा सकता है। गतिहीन जीवनशैली आपकी कब्ज की समस्या को बढ़ा सकती हैं। इसीलिए, रोजाना एक्सरसाइज करें, प्राणायाम करें। उससे आपको कब्ज और बवासीर जैसी समस्याओं से राहत मिलती हैं और आपको मल त्याग के दौरान कोई भी कठिनाई नहीं होती है।
मल त्याग में दर्द कैसे ठीक करें
मल त्याग में दर्द कैसे ठीक करें

दोस्तों, मल त्याग के दौरान हो रहे दर्द को आप हल्के में ना लें। इसके बारे में किसीसे चर्चा करें, इस बारे में ना हिचकिचाए। ऊपर दिए हुए घरेलू इलाजो का पहले इस्तेमाल करें। उनको अपनाने के बाद भी अगर आपकी समस्या नहीं जा रही है, तो आप डॉक्टर की सलाह ले। उम्मीद है, दोस्तों आपको आज का यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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