दिमागी बुखार कैसे होता है और कैसे जांच करे

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नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? पिछले कई सालों से मानवजाति अनेक बीमारियों से जूझ रही है। उसमें और नई नई बीमारियां शामिल हो रही है। ऐसे में हमें अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखना चाहिए। दिमागी बुखार यानी इंसेफेलाइटिस। इस बीमारी में मस्तिष्क में सूजन आ जाती है, जो कि हमें कभी कभी समझ में भी नहीं आती। यह बीमारी साधारण से गंभीर रूप ले सकती है। यह बीमारी वायरल इन्फेक्शन की वजह से होती है या तो हमारी इम्यून सिस्टम अबनॉर्मली हमारे ब्रेन टिश्यूज़ पर अटैक करती हैं, उसकी वजह से भी होती है।

दिमागी बुखार के लक्षण फ्लू की तरह ही होते हैं। ब्रेन फीवर या बुखार होने की वजह से हमारे ब्रेन पर बहुत बुरा असर हो सकता है। इससे आदमी बहकी बहकी बाते करने लगता है, क्योंकि इस बुखार का सीधा असर आपके दिमाग पर होता है। इसीलिए, आपको कुछ ऐसे ही लक्षण दिखे तो आप तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह ले। तो दोस्तो, आज जानते हैं दिमागी बुखार के बारे में।

दिमागी बुखार के कारण ( कैसे होता है )

दिमागी बुखार होने के कई कारण हो सकते हैं। हम एक एक करके सब जानते हैं।

  1. दिमागी बुखार का कारण हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस की वजह से होनेवाले स्किन इन्फेक्शन है। यह इन्फेक्शन त्वचा की छोटी छोटी नर्व द्वारा हमारे मस्तिष्क तक पहुंचता हैं। हमारे दिमाग में टेंपोरल लोब नाम का एक ऐसा हिस्सा होता है, जो हमारे वाणी तथा हमारे मेमोरी को कंट्रोल करता है। यह वायरस इसी हिस्से को अटैक करता है।
  2. हम जब छोटे होते हैं, तब हमें अलग-अलग तरह के टीके या फिर वैक्सीन लगते हैं। अगर यह टीके ना लगे, तो भी हमें दिमागी बुखार का सामना करना पड़ सकता है। पोलियो, रुबेला यह टीके हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। रेबीज वायरस, पोलियो वायरस आदि के कारण भी बुखार हो सकता है।
  3. सेंट लुई वायरस, वेस्ट नील वायरस आदि विषाणुओं के संक्रमण से दिमाग पर सूजन आ जाती है। इसकी वजह से आपको दिमागी बुखार हो सकता है। इन घातक वायरस के इन्फेक्शन से बचना चाहिए।
  4. जीवाणु के संक्रमण से होनेवाले दिमागी बुखार दो प्रकार के होते हैं। प्राइमरी इंसेफेलाइटिस और सेकंडरी इंसेफेलाइटिस। प्रथम प्रकार में विषाणु सीधा आपके दिमाग पर ही असर करता और यह संक्रमण एक ही जगह तक सीमित रहता है। दूसरे प्रकार में हमारी इम्यून सिस्टम कमज़ोर होने पर विषाणु हमारे ब्रेन सेल्स पर आक्रमण करता है।

दिमागी बुखार के लक्षण

दिमागी बुखार के लक्षण अलग अलग होते हैं।

  1. साधारण लक्षण- कम मात्रा में इन्फेक्शन अगर हुआ हो तो फ्लू जैसे साधारण से लक्षण दिखाई देते हैं। जैसे कि, सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, बुखार आदि।
  2. गंभीर लक्षण-  वहीं इन्फेक्शन अगर गंभीर हो तो लक्षण अलग होते हैं। जैसे कि, मिर्गी, बोलने और सुनने में परेशानी, शरीर के कुछ अंगो में लकवा आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।

दिमागी बुखार की जांच

अगर आपको साधारण से लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो आप डॉक्टर को मिलकर इसका इलाज करा सकते हैं। लेकिन अगर लक्षण गंभीर रूप के हैं, तो आप तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और अपना इलाज कराए। आपके लक्षणों के आधार पर डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट करने को बोलेंगे। आप डॉक्टर की सलाह मानकर यह जांच जरूर करें।

  1. ब्लड टेस्ट- ब्लड टेस्ट यह दिमागी बुखार के जांच का एक अहम हिस्सा है। ब्लड टेस्ट में आपके शरीर की सारी पेशियां, प्लेटलेट्स आदि के बारे में जानकारी मिलती है। जिससे आपके डॉक्टर को आपके बॉडी पार्ट्स के स्थिति के बारे में समझता है। जिससे वह आपको आगे की जानकारी देते हैं।
  2. एमआरआई और सीटी स्कैन- एमआरआई और सीटी स्कैन से आपके दिमाग पर आईं सूजन, कौनसे वायरस का इंफेक्शन है, आपके ब्रेन में आए बदलाव तथा आपके दिमाग का कौनसा हिस्सा ज्यादा प्रभावित हुआ है, यह पता चलता है। दिमागी बुखार होने के बाद यह स्कैन बहुत ही आवश्यक होता है और ऐसे मरीज़ को यह टेस्ट अनिवार्य होता है।
  3. ईईजी- ईईजी याने इलेक्ट्रो एंसीफलोग्राफ टेस्ट। इस  टेस्ट में आपकी खोपड़ी पर तारो का उपयोग करके आपके मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं। इस टेस्ट में कौनसे वायरस से संक्रमण हुआ है यह नहीं समझता। किंतु, न्यूरोलॉजिस्ट को ईईजी पैटर्न इंफेक्शन बढ़ने के खतरे के बारे में जरूर सचेत करता है।

दिमागी बुखार का इलाज

वैसे तो दिमागी बुखार में गंभीर स्थिति तक पहुंचना और जान के लिए खतरा बढ़ना, यह बहुत ही कम बार देखने को मिलता है। इसके कुछ लक्षण दिखते ही आप डॉक्टर के पास जाकर जांच करा लें। बहुत ही कम केसेस में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। आइए जानते हैं इसके इलाज के बारे में।

  1. पैन किलर- दिमागी बुखार में मरीज को शारीरिक कमजोरी और बदन दर्द, जोड़ों में दर्द होता है। इसके लिए आपको डॉक्टर पैन किलर्स देंगे जिससे आपको आराम मिलेगा। इंफेक्शन को कम करने के लिए एंटीबैक्टीरियल तथा एंटीवायरल दवाइयां और कुछ एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं।
  2. वेंटिलेटर का उपयोग- दिमागी बुखार में कभी कभी मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसे में कृत्रिम श्वसन दिया जाता है। जिसके लिए वेंटिलेटर का उपयोग करते हैं।
  3. दवाइयां- दिमागी बुखार के मरीज को ओरल दवाइयां या आईवी याने नसों द्वारा दवाइयां दी जाती हैं। जिनकी वजह से आपके दिमाग में सूजन तथा जलन और दिमाग के संक्रमण को नियंत्रित किया जाता है। यह इलाज का बहुत ही आम तरीका है।
  4. मरीज का ख्याल रखना- जैसे कि हमने देखा, दिमागी बुखार में मरीज काफी अशक्त हो जाता है। ऐसे में उसकी देखभाल करना ज़रूरी होता है। मरीज को ज्यादा से ज्यादा देर तक आराम करना चाहिए। समय समय पर उसे फलों का जूस तथा फल देते रहना चाहिए, जिससे उसे बेहतर महसूस हो। अगर मरीज को ज्यादा बुखार हो तो उसे ठंडे बर्फ के पानी से सिकाई करनी चाहिए। जिससे उसके शरीर का तापमान नियंत्रित रहें।

दिमागी बुखार होने से कैसे बचें

दोस्तों, कोई भी बीमारी होने पर दवाइयां लेने से अच्छा है कि उसे पहले से ही रोक दिया जाएं। तो आइए जानते हैं दिमागी बुखार होने से केसे बचे।

  1. टीकाकरण- हमें हमारे बच्चों का टीकाकरण बचपन में ही समय पर पूरा करा लेना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, बच्चे के हर एक टीके को पूरा करे। ऐसा करने से हम बुखार को अपने से दूर रख सकते हैं। रुबेला, रेबीज, मम्प्स वायरस के टीकाकरण से दिमागी बुखार होने से बच सकते हैं।
  2. स्वच्छता का पालन- हमें हमारे जीवन में स्वच्छता का पालन करना चाहिए। हमारे बच्चों को तथा हम सभी को ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए जिनको पहले से ही एन्सेफेलाइटिस की लागत हुई हो। हर बार टॉयलेट का उपयोग करने के बाद में हाथ तथा पैर स्वच्छ धोए और ऐसे ही आदतों को अपने जीवन में अपनाएं।
  3. खुद की देखभाल- जहा पर दिमागी बुखार किसी कीड़े या आम तौर पर मच्छरों के काटने से फैल रहा हो, ऐसी जगह जाने से बचें। सुबह श्याम जिस वक्त मच्छर आते हैं, ऐसे वक्त बाहर जाने से बचे। मच्छरों से सुरक्षा के लिए क्रीम और घरों में अगरबत्ती का इस्तेमाल करें। पूरे हाथ और पैर ढक सके, ऐसे कपड़े पहने। घर के आसपास पानी जमा ना होने दे, क्योंकि मच्छर पानी में प्रजनन करते हैं।
दिमागी बुखार कैसे होता है और कैसे जांच करे
दिमागी बुखार कैसे होता है और कैसे जांच करे

तो दोस्तो, यह था आज का ब्लॉग जिसमें हमने दिमागी बुखार के बारे में पूरी जानकारी ली। आशा है कि आपको आज का ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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