अमरबेल का पौधा

अमरबेल का पौधा के गुण हिंदी में

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अमरबेल का पौधा के गुण

अमरबेल का पौधा
अमरबेल का पौधा

अमरबेल का पौधा एक ऐसी लता  है, जो जिस पेड़ पर फैलती है उसी का रस चूसकर जीवित  बनी रहती है| यह पीले रंग की बेल होती है  जिसकी जड़ नही होती| यह बबूल आदि पेड़ो पर फैलती है|

पीले ,मोटे धागे की तरह यह अपना जाल वृक्ष की शकाओं पर फैला लेती है| इस बेल में से रस चूसने वाले तंतु निकालकर वृक्ष की टहनियों से चिपक जाते है| इसका प्रयोग कफ-पित्त जन्य व्याधियों केश तथा नेत्र रोगों, रक्त विकार, उदर विकार, चर्म रोग और आमवाद में हितकारी रहता है|

अमरबेल का पौधा घरेलू उपाय :

रक्तविकार:

7-7 ग्राम अमरबेल तथा मुंडी को पानी में उबालकर पानी को छानकर रोगी को पिलाए | 15-20 दिन में ही खून की खराबी दूर हो जाती है|

पेट के कीड़े:

अमरबेल को पानी में उबालकर छान ले| इस पानी को पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं|

खुजली:

इसकी बेल को पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाने से खुजली ठीक हो जाती है |

पुराना घाव :

अमरबेल को सुखाकर और एक समान मिलाकर  चूर्ण बना ले |  इसमें थोड़ा सा घी मिलाकर इस लेप को घाव पर  लगाने से पुराना घाव शीघ्र ठीक हो जाता है|

 सूजन को कम करने के लिए :

अमरबेल को पानी  में उबालकर  पानी  से सूजन वाले  भाग की सिंकाई करें तथा उबली हुई बेल को कुचलकर सूजन वाले पर भाग पर बाँध दे | कुछ ही दिनों तक इसके प्रयोग से सूजन उतर जाती है | यदि सूजन पकने वाली हो तो चार पांच बार बांधने पर पककर फुट जाती है|

लकवा का इलाज :

अमरबेल को पानी में उबालकर लकवे के  रोगी  को उसका वफर दें तथा इसके फोक को  पीसकर चेहरे पर बाँध दे  तथा  रीढ़ की हड्डी का  सेंक  करने से शीघ्र लाभ होता है |

यकृत विकार मी सहायता :

यकृत का आकर बढ़ जाए और उसमे कठोरता आ जाए तो अमरबेल का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम आधा कप पिए तथा बेल को पानी के साथ पीसकर पेट पर मोटा लेप लगाए |

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